दोनों डोज ले चुके लोगों में कोविड की आशंका कम- नरविजय यादव

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दोनों डोज ले चुके लोगों में कोविड की आशंका कम- नरविजय यादव

जग दर्पण संवाददाता

कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट भारत समेत विश्व के 30 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है, जिनमें 13 तो यूरोप के ही हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए वेक्सीनेशन और लॉकडाउन जैसे उपाय अपनाये जा रहे हैं। ब्रिटेन और फ्रांस जैसे कुछ देशों ने अपनी पूरी आबादी को वेक्सीन की बूस्टर डोज लगानी शुरू कर दी है। भारत में आबादी अधिक होने और कुछ लोगों की नादानी के चलते टीकाकरण अभियान पिछड़ रहा है। इसी कारण से नये

वेरिएंट के फैलने की आशंका पैदा हो गयी है। एक बड़ा तबका ऐसा है जिसने अभी तक पहला टीका नहीं लगवाया है। काफी संख्या ऐसे लोगों की भी है जिन्होंने दूसरा टीका नहीं लगवाया है। ऐसे लापरवाह लोग पूरे देश को मुसीबत में डालने की नादानी कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का लक्ष्य है कि दिसंबर के अंत तक बाकी बचे करीब 94 करोड़ लोगों को वेक्सीन की दोनों डोज लगा दी जायें। भारत में बनी और सबसे ज्यादा प्रयोग की जा रही कोविशील्ड वेक्सीन का असर करीब आठ

माह तक रहता है। विशेषज्ञों ने भारत में भी 40 साल से ऊपर आयु वालों को बूस्टर डोज लगाने की सिफारिश की है।

आंकड़ों के हिसाब से बात करें तो भारत में फिलहाल करीब 80 करोड़ लोग वेक्सीन लगवा चुके हैं। इनमें करीब 47 करोड़ लोगों को दोनों वेक्सीन लग चुकी हैं, जबकि 33 करोड़ ने सिर्फ पहली डोज लगवायी है। करीब 15 करोड़ घोर लापरवाह लोगों ने अभी तक वेक्सीन लगाने के बारे में सोचा भी नहीं है, या फिर इन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं है। दक्षिण अफ्रीकी वैज्ञानिकों

की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों डोज लगवा चुके लोगों को ओमिक्रॉन से संक्रमित होने का खतरा कम है। यह वेरिएंट ज्यादातर 40 साल से कम उम्र वालों को निशाने पर ले रहा है। यह फैलता तेजी से है, लेकिन प्राणघातक नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में बताया कि जोखिम वाले देशों से भारत पहुंची 58 उड़ानों से 16,000 यात्री भारत आये, जिनमें से 18 को पॉजिटिव पाया गया।

इनमें ओमिक्रॉन वेरिएंट है या नहीं, इसकी जांच चल रही है। बच्चों को वेक्सीन लगाने और बड़ों को बूस्टर डोज देने का निर्णय विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों की समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया जायेगा। ब्रिटेन में कुल सात तरह की वेक्सीन प्रयोग की गयीं, जिनका मिश्रण बूस्टर डोज में इस्तेमाल किया जा रहा है। वहां करीब तीन हजार लोगों पर इसका प्रभाव चैक किया गया और नतीजे आशाजनक रहे।

कोरोना की वापसी से लोग ही नहीं कंपनियां भी संशय में पड़ गयी हैं। शेयर बाजार का ग्राफ नीचे गिरने लगा है। पिछले डेढ़ साल की परेशानियां याद करते हुए, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनियों ने कच्चे माल और पुर्जों आदि का स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया है। भारत में लॉकडाउन लगे न लगे, लेकिन अन्य देशों में हवाई अड्‌डों और बंदरगाहों पर काम ठप होने की स्थिति में जरूरी चीजों की सप्लाई रुक सकती है। कार कंपनियां पहले ही सेमीकंडक्टर

की आपूर्ति बाधित होने से परेशान हैं और उनका उत्पादन घट गया है। आगे और दिक्कत न आये, इसके मद्देनजर टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और गोदरेज जैसी कंपनियों ने आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी करनी शुरू कर दी है।