बदायूं के जिला अस्पताल में लापरवाही और भ्रष्टाचार चरम पर नहीं मिला स्ट्रेचर, युवक की मौत

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बदायूं के जिला अस्पताल में लापरवाही और भ्रष्टाचार चरम पर नहीं मिला स्ट्रेचर, युवक की मौत

 

बदायूं। जिला अस्पताल में मंगलवार को अव्यवस्थाओं की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है और अस्पताल में पैसों की वसूली जमकर हो रही है। भ्रष्टाचार चरम पर है इसी के भेट एक युवक चढ़ गया है। यहां के स्टाफ और कर्मचारियों की लापरवाही से एक युवक की मौत हो गई। किडनी की बीमारी

से परेशान एक युवक अपने स्वजन के साथ बाइक पर जिला अस्पताल आया था। वह जैसे ही यहां उतरा उसका बीपी घट गया। वह बेहोश हो गया। स्वजन ने मौजूद स्टाफ से स्ट्रेचर की मांग की लेकिन कोई स्ट्रेचर लेकर नहीं आया। स्वजन ने युवक को हाथ और पैर पकड़ कर खुद ही उठाया और लेकर इमरजेंसी पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उसे देखा और कुछ देर बाद मृत घोषित कर दिया।

बिल्सी तहसील क्षेत्र के गांव बन्नी निवासी मोगराज का बेटा संजू पिछले कुछ महीनों से किडनी की बीमारी से जूझ रहा था। उसकी दोनों किडनी खराब हो चुकीं थीं। स्वजन इलाज करा रहे थे। मंगलवार को संजू की डायलिसिस होनी थी। संजू के पिता मोगराज और ताऊ कप्तान बाइक पर उसे बैठाकर जिला अस्पताल लाए थे। डायलिसिस के लिए खून की आवश्यकता

थी। स्वजन के कहने पर उनके साथ गांव के डा. पवन यादव खून देने आए थे। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के पास पहुंचने पर जैसे ही संजू को बाइक से उतारा तो वह बेहोश होकर गिर गया। इस पर पिता और ताऊ ने ने इधर-उधर देखा लेकिन कोई स्ट्रेचर नहीं दिखा, वहां मौजूद स्टाफ से मदद मांगी, लेकिन कोई आगे बढ़कर नहीं आया। इसके बाद पिता और ताऊ ने ही

संजू को हाथ-पैर पकड़ कर उठाया और इमरजेंसी तक ले गए। इमरजेंसी में मौजूद स्टाफ उसे कुछ देर तक देखता रहा, लेकिन कुछ नहीं बताया। बाद में चिकित्सकों ने देखा और उसे मृत घोषित कर दिया। पिता और ताऊ जिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं को कोसते हुए संजू का शव लेकर घर चले गए। वर्जन

जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। लेकिन अगर मरीज को स्ट्रेचर नहीं मिला तो यह गंभीर विषय है। मैं जिले से बाहर हूं, डा. कप्तान सिंह को इस मामले की जांच के लिए कहा है।

डा. विजय बहादुर, सीएमएस, जिला अस्पताल

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